Thursday, June 29, 2017

दरिया रहा कश्ती रही लेकिन सफर तन्हा रहा...


दरिया रहा कश्ती रही लेकिन सफर तन्हा रहा
हम भी वहीं तुम भी वहीं झगड़ा मगर चलता रहा

साहिल मिला मंजिल मिली खुशियां मनीं लेकिन अलग
खामोश हम खामोश तुम फिर भी बड़ा जलसा रहा

सोचा तो था हमने, न आयेंगे फरेबे इश्क में
बेइश्क दिल जब तक रहा इस अक्ल पर परदा रहा

शिकवे हुए दिल भी दुखा दूरी हुई दोनों में पर
हर बात में हो जिक्र उसका ये बड़ा चस्का रहा

छाया नशा जब इश्क का 'चर्चित' हुए कु्छ इस कदर
गर ख्वाब में उनसे मिले तो शहर भर चर्चा रहा

- विशाल चर्चित

Wednesday, June 28, 2017

प्रेम का हो एक नया श्रृंगार अब...

आ प्रिये कि हो नयी 
         कुछ कल्पना - कुछ सर्जना,
              आ प्रिये कि प्रेम का हो 
                    एक नया श्रृंगार अब.....

      तू रहे ना तू कि मैं ना 
           मैं रहूँ अब यूं अलग
                 हो विलय अब तन से तन का 
                       मन से मन का - प्राणों का,
                             आ कि एक - एक स्वप्न मन का
                                   हो सभी साकार अब....

          अधर से अधरों का मिलना
                 साँसों से हो सांस का,
                         हो सभी दुखों का मिटना
                               और सभी अवसाद का,
                                       आ करें हम ऊर्जा का
                                             एक नया संचार अब.....

        चल मिलें मिलकर छुएं
             हम प्रेम का चरमोत्कर्ष,
                   चल करें अनुभव सभी
                         आनंद एवं सारे हर्ष,
                               आ चलें हम साथ मिलकर
                                     प्रेम के उस पार अब....

         ध्यान की ऐसी समाधि
             आ लगायें साथ मिल,
                   प्रेम की इस साधना से
                         ईश्वर भी जाए हिल,
                              आ करें ऐसा अलौकिक
                                   प्रेम का विस्तार अब....

                                 - VISHAAL CHARCHCHIT

Tuesday, June 27, 2017

तू जो साथ है.....


तू जो साथ है दिन - रात है मेरी ज़िन्दगी सौगात है
तू जो एक पल को भी दूर हो हर बात फिर बेबात है

तू बसा है जबसे निगाह में लगे हर तरफ मुझे रौशनी
तू जो रूठ जाये अगर कभी तो फिर अश्कों की बरसात है

तू दिल हुआ धड़कन हुआ मेरी साँसों की थिरकन हुआ
तू जो है तो है ये वजूद अब नहीं बेवजह कायनात है

तू उतर चूका है लकीर में मेरी हाथों की कुछ इस कदर
तू जो मोड़ ले अब मुंह अगर लगे लुट चुकी ये हयात है

तू जुड़ा उड़ीं ख़बरें कई अजी लो गया अब तो 'विशाल'
तू हिला नहीं मेरे साथ से तो ख़बर में अपना ये साथ है

- विशाल चर्चित

Sunday, June 25, 2017

अपनी गलती पे भी ध्यान देते रहो...


होता है कई बार ऐसा
जब हम कहते कुछ हैं
लोग समझते कुछ हैं,
होता है कई बार ऐसा
जब हम लिखते कुछ हैं
लोग पढ़ते कुछ हैं,
होता है कई बार ऐसा
जब हम दिखाते कुछ हैं
और लोगों को दिखता कुछ है...

होता है इसका परिणाम ये कि-
नहीं मिलता अपेक्षित प्रतिसाद
नहीं मिलता अपेक्षित उत्तर
नहीं मिलती अपेक्षित प्रशंसा...

और हम संतुष्ट हो जाते हैं
ये सोचकर कि -
लोगों में समझ ही नहीं है
लोगों के खराब हो गये हैं कान
लोगों की खराब हो गयी हैं आँखें...

कभी ये नहीं सोचते कि -
हमारे कहने में ही रह गयी थी
हमसे ही हो गयी थी चूक
हमारा लिखा हुआ ही नहीं था सटीक
हमने दिखाया ही था गलत...

इसीतरह से विश्वास और भरोसा है
जब हम लगा बैठते हैं
आसानी से अपनों पर आरोप कि -
आपको मुझपर विश्वास नहीं है?
आप मुझपर शक कर रहे?
आपको मुझपर संदेह है?

कभी कोशिश भी नहीं करते
ये सोचने की कि -
क्यों टूटा उनका विश्वास
क्यों हुआ उनको हम पर शक
क्यों लगता है उन्हें
हमारा हर व्यवहार ही संदिग्ध...

क्या किया जाये
ईश्वर देता ही नहीं है
सबको इतना आत्मज्ञान
सबको इतना विवेक
कि कर सकें अपनी हर बात
हर व्यवहार की विवेचना
कर सकें अपना आत्ममंथन...

और यही है
अधिकांश दुखों का सार,
अधिकांश कलह-क्लेश का कारण
अधिकांश रिश्तों में विघटन की वजह...

क्योंकि -
सही हो सही भी दिखो तो सही
सच्चे हो सच्चे हरदम रहो तो सही
सच है तो सच को दिखाया करो
गलतफहमियाँ रिश्तों में मत बढ़ाया करो
अपनी गलती पे भी ध्यान देते रहो
दूसरों की सदा मत दिखाया करो...

-विशाल चर्चित

Friday, June 23, 2017

कमजोर पड़ता दिख रहा अब 'देसी' च्यवनप्रास...


कर्म करके फल पायें ये आम बात है, कर्म कोई और करे लेकिन फल पायें हम ये खास बात है... अध्यापक पढ़ाये और हम मेहनत से पढ़ाई करें परीक्षा में प्रश्नपत्र हल करें और तब पास हों ये आम बात है, हम करें घुमाई अध्यापक पढ़ाये वही हल करे प्रश्नपत्र परीक्षा में और हम अच्छे अंकों से पास हो जायें तो ये खास बात है... बच्चे विद्यालय जायें शिक्षक मन लगाकर पढ़ायें अधिकांश बच्चे पास हो जायें ये आम बात है, बच्चे विद्यालय जायें शिक्षक चुटकुले सुनायें पढ़ने के लिये कोचिंग बुलायें जो जाये कोचिंग सिर्फ वही हो पास तो ये खास बात है... महीने भर मेहनत से काम करें और तब पायें तन्ख्वाह ये आम बात है, घर में बैठ कर भी लगे हाजिरी और पायें मोटी तन्ख्वाह तो ये खास बात है... नौ महीने तक तमाम तकलीफें सहें तब कहीं जाकर मातृत्व सुख मिले ये आम बात है, कोई और तकलीफें सहे हमारी सेहत और सुन्दरता ज्यों की त्यों बनी रहे और मातृत्व सुख भी पा जायें तो ये खास बात है... हम करें अपराध पुलिस आये पकड़्कर ले जाये ये आम बात है, हम करें अपराध और हम ही पुलिस बुलायें अपनी जगह किसी और को पकड़वायें तो ये खास बात है... हम पड़ें बीमार डॉक्टर वसूले भारी फीस और तब हो हमारा इलाज ये आम बात है, हम पड़ें बीमार कोई और बिल चुकाये हमारी एक किडनी डॉक्टर चुपके से उसे थमाये तो ये खास बात है... अदालत में चले मुकदमा सारे सबूत गवाह जुटायें केस जीत जायें ये आम बात है, न गवाह न सबूत लायें सीधे जज को पटायें केस जीत जायें तो ये खास बात है.... हमेशा करें अच्छे काम हमेशा तारीफ पायें चर्चित हो जायें ये आम बात है, हमेशा करें उल्टे सीधे काम हमेशा खिंचाई करायें और खूब चर्चा में आयें तो ये खास बात है.... अब आप करें फैसला बनना है आम या खास, पर इतना जान लीजिये कि कमजोर पड़ता दिख रहा अब 'देसी' च्यवनप्रास... - विशाल चर्चित

Saturday, June 17, 2017

मानो तो मामूली सिक्का हो जाता है हजारों का...

जिधर देखो उधरहै दुख ही दुख,
जिसे देखो वही
है दुखी-है निराश,
क्योंकि उन्हें
नहीं आता सुखी होना,
उन्हें लगता है कि
गाड़ी-बंगला और
करोड़ों की कमाई को ही
कहते हैं सुखी होना...

लेकिन यदि ऐसा होता तो
नहीं दिखती मुस्कान कभी
किसी भी गरीब के चेहरे पर,
नहीं दिखते आंसू कभी
किसी अमीर के चेहरे पर...

लोग दुखी हैं क्योंकि
उनको चाहिये सब कुछ
अपनी ही पसंद का
अपने ही हिसाब से,
उससे कम पर तो
नहीं होना है कभी खुश
नहीं होना है कभी संतुष्ट...

सब कुछ छीन लेना है
सब कुछ झपट लेना है
सब कुछ हथिया लेना है,
ईश्वर-खुदा-गॉड या ऊपरवाला
तो जैसे है सिर्फ
आदेश सुनने के लिये ही,
ये आदेश होता है
पूजा के रूप में या
इबादत के रूप में
प्रार्थना के रूप में...

यदि हो गया अपने मन का
तो खुश कि देखा?
मैंने कर दिखाया न?!
मैं ये - मैं वो...
और जब नहीं होता
अपने मन का तब
शुरू होता है रोना
दूसरों की गलती पर
अपने भाग्य पर
या फिर ईश्वर पर...

लो सुनो एक उपाय
करके देखो एक प्रयोग
सुखी जीवन के लिये
शांतिमय हर पल के लिये
हमेशा मुस्कुराने के लिये...

सच में स्वीकार लो
ईश्वर की सत्ता को,
सीख लो स्वीकारना
अपनी हार को,
मान लो कि
तुम्हें कुछ नहीं है पता,
मान लो कि
नहीं है कुछ भी
तुम्हारे हाथ में और
छोड़ दो तर्क करना...

फिर करो महसूस
ईश्वर को-प्रकृति को
अपने भाग्य को
सुख को-सुकून को...

सार ये है कि -
सुख-दुःख है सब झूठी बातें
सारा खेल विचारों का,
मानो तो मामूली सिक्का
हो जाता है हजारों का...

- विशाल चर्चित