Saturday, May 06, 2017

ओ मेरे जीवन तू पा मृत्यु की जीवंतता...


ना हर्ष हो न विषाद हो
ना द्वेष हो न तो राग हो,
ओ हृदय, हो तू भाव शून्य
तेरा शून्य प्रत्येक ही भाग हो...

ना स्वप्न हो न हो कल्पना
ना योजना न तो सर्जना,
हो मेरे मस्तिष्क सुप्त
हो सकल स्मृति ही लुप्त...

ना लक्ष्य हो न तो यात्रा
ना भार हो न तो मात्रा,
मेरी इंद्रियों, सब शिथिल हो
मेरे रोम रोम शिथिल हो...

ना श्वास हो न स्पंदना
ना ऊष्मा उत्सर्जना,
ओ मेरे जीवन, तू पा
मृत्यु की जीवंतता...

- विशाल चर्चित

Friday, May 05, 2017

ख्वाब में ही सही रोज़ आया करो....

ख्वाब में ही सही रोज़ आया करो
मेरी रातों को रौशन बनाया करो

ये मुहब्बत यूँ ही रोज़ बढती रहे
इस कदर धड़कनें तुम बढ़ाया करो

मैं यहाँ तुम वहाँ दूरियां हैं बहुत
अपनी बातों से इनको मिटाया करो

मुझको प्यारा तुम्हारा है गुस्सा बहुत
इसलिए तुम कभी रूठ जाया करो

मुझे घेरें कभी मायूसियां जो अगर
बच्चों सी दिल को तुम गुदगुदाया करो

तुमको मालूम है लोग जल जाते हैं
नाम मेरा लबों पे न लाया करो

जुड़ गयी ज़िन्दगी इसलिए तुम भी अब
नाम के आगे चर्चित लगाया करो

- VISHAAL CHARCHCHIT

Thursday, May 04, 2017

बच्चा नहीं चच्चा !!!!


जच्चा के पेट का जब
हुआ अल्ट्रासाउन्ड,
नर्स हिल गयी
अस्पताल हिल गया
देखा जब पेट के
अन्दर का बैकग्राउन्ड...

मां खुद देख रही थी
स्क्रीन पर आंखें फाड़,
जिसको समझी थी तिल
वो तो दिख रहा ताड़...

बच्चा नहीं ये चच्चा
दुनिया में आने से पहले ही
फेसबुक से यारी कर रहा,
अपने आने की खबर वाली
पोस्ट वाल पर जारी कर रहा...

बालक
क्या संकेत दे रहा है,
एक नये युग का सूत्रपात
किये दे रहा है...
मां बाप इस उम्र तक
जितना भी सीख पाये हैं,
लाल पेट में ही
वहां से आगे कदम बढ़ाये है...

सुनी होगी आप सबने
अभिमन्यु वाली कहानी,
मां की पेट में ही सीखा
चक्रव्यूह तोड़ डालना
अपने बाप की जुबानी...

ये किस्सा बहुत पुराना है
अब आया नया जमाना है
बच्चों के जरिये मां बाप को
अब अपना ज्ञान बढ़ाना है...

बच्चे स्कूल जाते हैं
न जाने क्या - क्या
सीख के आते हैं
और होम वर्क के जरिये
अपने मां बाप को सिखाते हैं,
लेकिन बात यहीं तक होती
तो कोई बात नहीं थी,
पर बात - बात पे अक्सर
अब तो उल्लू भी बनाते हैं...

इसलिये आंख खोल कर
होशो हवास में रहिये,
मां बाप बने रहना है तो
नया - नया सीखते रहिये,
वर्ना तो कल को केवल
पछताना रह जायेगा,
देखते ही देखते आपका बच्चा
आपका मां बाप बन जायेगा...

- विशान चर्चित

Tuesday, May 02, 2017

माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!


अब तक नहीं आयी
कहां तू लुकाई
भूख ने पेट में
हलचल मचाई
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

गयी जिस ओर
निगाह उस ओर
घर में तो जैसे
सन्नाटे का शोर
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

ये हरे भरे पत्ते
बैरी हैं लगते
कहते हैं मां गई
तेरी कलकत्ते
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

जल्दी से आओ
दाना ले आओ
इन सबके मुंह पे
ताला लगाओ
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

अब हम न मानेंगे
उड़ना भी जानेंगे
तेरे पीछे-पीछे हम
आसमान छानेंगे
माँ !...ओ माँ !!...ओ माँ !!!

- विशाल चर्चित

Saturday, April 15, 2017

बुझे चराग जले हैं जो इस बहाने से...


बुझे चराग जले हैं जो इस बहाने से
बहुत सुकून मिला है तेरे फिर आने से

बहुत दिनों से अंधेरों में था सफर दिल का
इक आफताब के बेवक्त डूब जाने से

नया सा इश्क नयी सी है यूं तेरी रौनक
लगे कि जैसे हुआ दिल जरा ठिकाने से

चलो कि पा लें नई मंजिलें मुहब्बत की
बढ़ा हुआ है बहुत जोश चोट खाने से

कसम खुदा की तेरे साथ हम हुए चर्चित
जरा सा खुल के मुहब्बत में मुस्कुराने से

- VISHAAL CHARCHCHIT

Sunday, April 02, 2017

तब ध्यान करो प्रकृति की तरफ...


चहुँ ओर दिखे अंधियारा जब
सूझे न कहीं गलियारा जब,
जब दुखों से घिर जाओ तुम
जब चैन कहीं ना पाओ तुम...

मन व्याकुल सा - तन व्याकुल सा
जीवन ही लगे शोकाकुल सा,
कोई मीत न हो - कोई प्रीत न हो
लगता जैसे कोई ईश न हो....

तब ध्यान करो प्रकृति की तरफ
ईश्वर की परम सुकृति की तरफ,
देखो तो भला सागर की लहर
उठती - गिरती जाती है ठहर...

अनुभव तो करो शीतलता का
पुरवाई की कोमलता का,
तुम नयन रंगो हरियाली से
पुष्पों की सुगन्धित लाली से....

तुम गान सुनो तो कोयल का
बहती सरिता की कलकल का,
पंछी करते क्या बात सुनो
कहता है क्या आकाश सुनो....

निकालोगे निराशा के तम से
निकलो तो भला अपने तन से,
है आस प्रकाश भरा जग में
रंग लो हर क्षण इसके रंग में....

जो बीत गया सो बीत गया
तम से निकला वो जीत गया,
उस जीत का तुम अनुभव तो करो
अनुभव तो करो - अनुभव तो करो...

- VISHAAL CHARCHCHIT